Wednesday, 11 October 2017

कैमरे की भूमिका हमारी निगरानी और सुरक्षा में

सुरक्षा और निगरानी की जरुरत को दिलखाती हुई एक पोस्ट दिखाई दी अभी! बहुत साधारण और सधे हुए शब्दों से बहुत ही स्पष्ट बात इन्होने बताई है! मेरे लिए बहुत आसानी हो गयी है अपनी बात कहने में!  आदरणीय शारदा अरोरा जी ने यहाँ बताया है कि भाग दौड़ की जिन्दगी में लड़ाई झगड़े हादसे बढ़ते जा रहे है! आपसी समझदारी से परिस्थिति सम्भाली जा सकती है!

मै थोड़ी आगे की बात करना चाहता हूँ! मौके पर बीच बचाव हो गया अधिक नुक्सान नहीं हुआ, और बात सम्भल गयी तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि ऐसा न हो पाया, बात अधिक बढ़ गयी और नुक्सान अधिक हो गया तो क्या होगा कैसे होगा?

कैसे निर्णय लिया जाए कि असल में गलती कौनसे पक्ष की है जबकि दोंनो पक्ष खुद को सही बताये? सोसायटी आदि में ये बड़ी समस्या है! दूसरा कुछ चोरी की घटना हो जाए तो? चौकीदार की निगरानी की एक सीमा है! वो उपस्थित होकर भी सब जगह एक ही समय में नहीं देख पाएगा!परिवार वाला आदमी है बेचारा कई बार देख कर भी बताने की हिम्मत नहीं कर पाएगा! कई बार डर अथवा तो लालच में गलत सुचना दे सकता है! इस से समस्या के सही समाधान में कोई साहयता तो मिलेगी ही नहीं वरन समस्या और बढ़ेगी ही!

इसके लिए आजकल सीसीटीवी कैमरे का विकल्प मुझे एक बेहतर विकल्प लगता है! ना काहुँ से दोस्ती ना काहुँ से बैर है कैमरे का तो!जो दिखा वो रिकोर्ड कर लिया, जो रिकॉर्ड हुआ वो ही जो का त्यों दिखा भी दिया!दूसरी कोई बात ही नहीं!कैमरे की भूमिका हमारी निगरानी और सुरक्षा में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है इस दृष्टि से!इसका कोई विकल्प ही नहीं दिखाई देता!
कैमरे की कीमत, विशेषता, गुणवत्ता आदि अन्य बहुत से विषय है जिन पर आने वाले दिनों में चर्चा होती रहेगी! बस आप सब के सुझाव हुए सवालो का मार्गदर्शन हमें आगे बढ़ने में बहुत सहायक होगा तो उसकी बहुत अपेक्षा है!अभी तो सफर शुरू हुआ है बहुत दूर तक चलना है ! 

1 comment:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद , ये समस्या विकराल रूप चुकी है।

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